कभी अलग लय में चलने वाली काशी…अब रीलबाजों के बीच फंसी हुई नजर आती है। घाटों पर अब सुकून की जगह बस भीड़ ही भीड़ दिखती है। खैर रील की दुनिया से निकालकर आपको इस जिंदादिल शहर के एक ऐसी गली में ले चलते हैं, जहां दरकते दिवारों के बीच रखी है एक पुरानी सी शहनाई और उसी दिवार पर लिखा है ‘भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां