(खबरें अब आसान भाषा में)
अब यूजर्स को कंटेंट AI नहीं होने का डिक्लेरेशन देना होगा। कंपनियों को AI डिटेक्शन सॉफ्टवेयर लगाने होंगे। AI से बने कंटेंट की लेबलिंग करनी होगी। कंपनियों को हर 3 महीने में पॉलिसी अपडेट देना होगा। डीप फेक अपलोड करने वाले उपभोक्ता को चेतावनी देनी होगी