(खबरें अब आसान भाषा में)
अभी हर इंडिविजुअल यानी हर व्यक्ति को अलग टैक्सपेयर माना जाता है। पति-पत्नी मिलकर कमाते हैं, इनवेस्ट करते हैं और मिलकर खर्च करते हैं तो भी उन्हें अलग-अलग रिटर्न फाइल करना पड़ता है। उनके लिए स्लैब, एग्जेम्प्शन लिमिट और डिडक्शन की लिमिट भी अलग-अलग होती है