जब स्कूलों पर बमबारी होती है या उन्हें सैन्य बैरकों में तब्दील कर दिया जाता है तो शिक्षा व्यवस्था, युद्ध के सामने मानो घुटने टेकती दिखाई देती है. आज, युद्धग्रस्त क्षेत्रों में रह रहे लाखों-करोड़ों बच्चों के लिए, हिंसक टकराव की क़ीमत केवल पढ़ाई का ठप हो जाना ही नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा, स्थिरता और उस भविष्य का भी नुक़सान है, जिसका वादा उनसे किया गया था.