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मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली की वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है। जब तक जियोपॉलिटिकल रिस्क में कमी नहीं आती है और अमेरिका के साथ ट्रेड डील का ऐलान नहीं होता है रुपये पर दबाव बना रह सकता है