Sheikh Hasina: शेख हसीना ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा कोई विकल्प नहीं थी, बल्कि यह सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी और नैतिक कर्तव्य थी। उन्होंने अपने शासनकाल की तुलना मौजूदा हालात से करते हुए कहा कि पहले अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान किया जाता था, जबकि अब मुहम्मद यूनुस की सरकार में असहमति को दबाया जा रहा है