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गुरुवार (18 दिसंबर) को यह मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कानूनी दम नहीं है और यह याचिका स्वीकार करने योग्य नहीं है