(खबरें अब आसान भाषा में)
रुपये में इस साल आई 6.6 फीसदी की गिरावट साइक्लिकल नहीं है बल्कि यह एक दशक से ज्यादा समय से चले आ रहे दबाव का नतीजा है। 2012 से अब तक रुपये की वैल्यू 90 फीसदी से ज्यादा गिरी है। स्ट्रकचरल कमजोरी का असर रुपये को संभालने की आरबीआई की ताकत पर भी पड़ा है