यह पूरा विवाद जस्टिस स्वामीनाथन के उस आदेश से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि कार्तिगई दीपम का दीया सिर्फ उची पिल्लैयार मंदिर के पास ही नहीं, बल्कि थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित दीपाथून नामक पत्थर के खंभे पर भी जलाया जाए। कोर्ट के अनुसार यह खंभा मंदिर की जमीन पर आता है और पास की दरगाह की सुरक्षित संपत्ति में शामिल नहीं है