हम लोगों में से अधिकांश लोगों स्कूल-कॉलेज के दिनों में मुंशी प्रेमचंद की एक प्रसिद्ध कहानी ‘मंत्र’ जरूर पढ़ी होगी। उस कहानी के पात्र डॉक्टर चड्ढा के बारे में तो लगभग उन सभी लोगों को पता होगा जिन्होंने ‘मंत्र’ कहानी को पढ़ा है। ‘मंत्र’ कहानी के जैसा एक और वाकया हमने बुधवार (23 अक्टूबर) को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में देखा जहां बुखार से पीड़ित एक 5 वर्षीय बच्ची इलाज के बिना तड़प-तड़प के मर गई। इस बच्ची के परिजनों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी इसी दौरान क्रिकेट खेल रहे थे। इस बात की जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है कि पीड़ित परिवार के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
मुंशी प्रेमचंद ने आज से कई सालों पहले जिस डॉक्टर चड्ढा का जिक्र अपनी कहानी ‘मंत्र’ में किया था, वो शायद ऐसा ही रहा होगा। इस कहानी में एक बूढ़ा जिसका नाम भगत था वो अपने 7 वर्षीय बच्चे के इलाज के लिए डॉक्टर चड्ढा के पास पहुंचता है, लेकिन डॉक्टर साहब अपनी सिगार जलाते हुए ये कहकर उसके बच्चे को नहीं देखते हैं कि उनके गोल्फ खेलने का समय हो गया है वो बाद में आए। बूढ़ा लगातार डॉक्टर चड्ढा के सामने गिड़गिड़ाता रहा और कहता रहा साहब 7 बच्चों में से आखिरी बच्चा बचा है 4 दिन से तेज बुखार की वजह से आंख नहीं खोली है इसने एक निगाह देख लीजिए मन को तसल्ली हो जाएगी। डॉक्टर चड्ढा बूढ़े की बात अनसुनी करके चले जाते हैं और उस बुजुर्ग का आखिरी चिराग भी बुझ जाता है।
बदायूं का राजकीय मेडिकल कॉलेज, जहां बच्ची ने इलाज के अभाव में तड़प-तड़प कर तोड़ दिया दम
पूरे अस्पताल में नहीं मिला कोई डॉक्टर
बदायूं में राजकीय मेडिकल कॉलेज में अपनी बच्ची के इलाज के लिए पहुंचे दंपति भी डॉक्टर का इंतजार करते रहे और डॉक्टर साहब क्रिकेट खेलने में व्यस्त रहे। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि जिले के मूसाझाग थाना क्षेत्र के थलिया नगला के निवासी नाजिम बुखार की शिकायत होने पर अपनी बेटी सोफिया को बुधवार दोपहर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे। प्राचार्य ने कहा, ‘नाजिम ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज में बाल रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं था। बाद में स्वास्थ्यकर्मियों ने बच्ची को इलाज के लिये अलग-अलग कमरों में भेजा लेकिन वहां कोई भी चिकित्सक या कर्मचारी मौजूद नहीं था। इसी दौरान बच्ची की मौत हो गयी।’
बच्ची के परिजनों की शिकायत पर 3 सदस्यों की जांच कमेटी गठित, फोटो – एआई
परिजनों का दावा डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी क्रिकेट खेल रहे थे
नाजिम ने दावा किया कि जब उन्होंने मेडिकल कॉलेज के बाहर आकर देखा तो डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी क्रिकेट खेल रहे थे। आरोप है कि काफी मिन्नत करने और गिड़गिड़ाने के बावजूद किसी भी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी ने बच्ची का इलाज नहीं किया और लगभग तीन घंटे तक तड़पने के बाद सोफिया ने अपनी मां की गोद में ही दम तोड़ दिया। डॉ. कुमार ने बताया कि यह बहुत दुखद घटना है और मामले की जांच के लिए तीन डॉक्टरों की एक समिति गठित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा इलाज न करने के बजाय क्रिकेट मैच खेलने के आरोप पर उन्होंने कहा कि मैच बाह्य रोगी विभाग के डॉक्टर नहीं खेल रहे थे। उन्होंने कहा कि संभवत: जिन डॉक्टरों का अवकाश था वे क्रिकेट खेल रहे होंगे।
क्या थी मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘मंत्र’?
हमने आपको डॉक्टर चड्ढा और बूढ़े भगत की कहानी का एक पार्ट तो बता दिया कि कैसे डॉक्टर साहब ने एक बुजुर्ग की आखिरी संतान के इलाज से ज्यादा जरूरी अपने गोल्फ खेलने को समझा था, लेकिन दूसरे पार्ट की कहानी अभी नहीं बताई जिसमें वही बूढ़ा भगत कैसे डॉक्टर चड्ढा के मुंह पर अपने कर्तव्य का तमाचा मारकर जाता है और आजीवन डॉक्टर चड्ढा को उनके व्यवहार पर सोचने पर मजबूर कर देता है। समय बीतता है और डॉक्टर चड्ढा के इकलौते बेटे कैलाश का 20वां जन्मदिन होता है। कैलाश को सांप पालने का शौक होता है। इस जन्मदिन की पार्टी में शहर के सारे दिग्गज पहुंचे हुए होते हैं। इसी दौरान कैलाश की क्लासमेट मृणालिनी उससे सांप दिखाने की बात कहती है। पहले तो कैलाश मना कर देता है लेकिन पार्टी में आए कुछ लोग कैलाश पर तंज कसते हैं कि हो सकता है सांपों के विषैले दांत तोड़ दिए हों। इससे कैलाश तैश में आकर सबसे जहरीले सांप को पकड़ता है और उसकी गरदन को तेजी से दबाकर दिखाता है कि ये मेरे सबसे जहरीले सांपों में से एक है। दांत दिखाने के बाद ज्यों ही कैलाश सांप को छोड़ने के लिए पकड़ ढीली करता है वैसे ही सांप उसे काट लेता है।
बूढ़े भगत ने बचाई कैलाश की जान, डॉक्टर चड्ढा को हुआ अपनी भूल पर पछतावा
उसी समय जोर की ठंड में बूढ़ा भगत अपनी झोपड़ी में बैठा आग ताप रहा था। उसे भी डॉक्टर चड्ढा के बेटे को सांप काटने की खबर मिलती है। भगत के 80 साल के जीवन में ये पहला मौका था जब उसने किसी को सांप काटने का समाचार सुना हो और चुपचाप बैठा हो। भगत सांप काटने का उपचार अपने मंत्रों से करता था। कितना भी जहरीला सांप क्यों न हो भगत के मंत्रों से उसका विष क्षण भर में पानी हो जाता था। भगत के मन में अंतर्द्वंद था कि चड्ढा के बेटे को देखने जाऊं या न जाऊं? भगत को अपने बेटे का दम तोड़ता वो चेहरा याद आ रहा था। उसने अपनी पत्नी से कहा अब डॉ. चढ्ढा को पता चलेगा कि बेटे की मौत का दर्द क्या होता है? लेकिन थोड़ी ही देर में भगत की मनोदशा पलटी मारती है वो सोचता है कि जीवन तो अमूल्य होता है जो गलती चड्ढा ने की क्या वो मुझे भी करनी चाहिए? इसके बाद वो डॉक्टर चड्ढा के बंगले पर पहुंचता है और अपने मंत्रों की शक्ति से उसके बेटे को ठीक कर देता है। इसके बाद भगत चुप-चाप वहां से चला गया। सुबह भगत का चेहरा देखकर डॉ. चढ्ढा को याद आया कि ये वही बुढ्ढा है जो एकबार अपने बेटे को इलाज के लिए लाया था, लेकिन तब तक भगत अपने घर जा चुका होता है। डॉ. चढ्ढा को अपने किये पर पछतावा होता है। वो भगत से क्षमा मांगने के लिए उसे ढूंढते हैं। डॉ. अपनी पत्नी से कहते हैं कि, गरीब और अशिक्षित होते हुए भी इस वृद्ध ने सज्जनता और कर्तव्य का आदर्श प्रस्तुत किया है।