यह मामला उन आरोपों पर आधारित है कि नेताओं और उनके सहयोगियों ने मिलकर उस कंपनी का गलत तरीके से नियंत्रण हासिल किया, जो पहले कांग्रेस से जुड़ी थी और जिसकी संपत्ति लगभग 2,000 करोड़ रुपए की थी। 3 अक्टूबर को दर्ज FIR के अनुसार, यह अधिग्रहण यंग इंडियन के जरिए किया गया, एक ऐसी कंपनी जिसमें गांधी परिवार के पास कुल मिलाकर 76 प्रतिशत शेयर थे