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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) वोल्कर टर्क ने चिन्ता जताई है कि पाकिस्तान में जल्दबाज़ी में पारित किए गए संवैधानिक संशोधनों से देश में न्यायपालिका की स्वतंत्रता कमज़ोर हुई है, और इन बदलावों से लोकतंत्र, सैन्य बलों की जवाबदेही, और क़ानून व्यवस्था के लिए दूरगामी नतीजे हो सकते हैं.