भारत और चीन के बीच LAC को लेकर समझौते के बीच PAK स्थित करतारपुर साहिब कॉरिडोर से जुड़ी बड़ी खुशखबरी सामने आई है। श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच समझौते को 5 साल के लिए रिन्यू किया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर साहिब कॉरिडोर को लेकर राजनयिक चैनलों के माध्यम से बातचीत हुई है। पाकिस्तान में स्थित श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारा सिख समुदाय के लिए बहुत पवित्र स्थान है। करतारपुर साहिब कॉरिडोर के रास्ते से भारत के हजारों सिख श्रद्धालु श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारा में हर साल पाकिस्तान जाते हैं।
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दृष्टिकोण और सिख संगत के सदस्यों के प्रति उनके असीम स्नेह तथा हमारी धार्मिक भावनाओं के प्रति सम्मान को ध्यान में रखते हुए, श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर के माध्यम से भारत से ऐतिहासिक गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर तक तीर्थयात्रियों की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए समझौते की वैधता को पांच और वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है।”
‘शिलान्यास समारोह में शामिल होने का सौभाग्य मिला’
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “बाबा नानक की दिव्य इच्छा से, मुझे 2018 में कॉरिडोर के शिलान्यास समारोह के दौरान उपस्थित रहने का सौभाग्य मिला और नवंबर 2019 में गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेकने के लिए पीएम मोदी जी द्वारा रवाना किए गए पहले जत्थे का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला।”
पीएम ने लंगर सेवा से GST हटाने को मंजूरी दी: हरदीप सिंह पुरी
उन्होंने कहा कि श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर के उद्घाटन के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी जी ने श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व, श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व के भव्य समारोह के आयोजन में भी गहरी व्यक्तिगत रूचि ली तथा लंगर सेवा से जीएसटी हटाने और दान के लिए एफसीआरए की मंजूरी दी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने करुणा और दृढ़ संकल्प दिखाते हुए 1984 की हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए और काबुल में हिंसा से बचने के इच्छुक सिखों को गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूपों के साथ सुरक्षित शरण भी दी। प्रधानमंत्री मोदी जी ने 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में घोषित करके हमारी भावनाओं का सम्मान भी किया।
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