जब किसी देश या क्षेत्र में हिंसक टकराव भड़कता है, तो वहाँ की क़ानून व्यवस्था और न्यायिक तंत्र उसकी भेंट चढ़ जाते हैं. बन्दूकों व बमबारी के थमने और शान्ति समझौता होने के बाद, एक नए संघर्ष की शुरुआत होती है. लड़ाई में तबाह हो चुके समाज को फिर से खड़ा करने और वहाँ क़ानून के शासन को स्थापित करने की जद्दोजहद, ताकि आम नागरिकों के लिए न्याय, संरक्षण व गरिमा को सुनिश्चित किया जा सके. संयुक्त राष्ट्र की टीम इस बदलाव को दिशा देने और क़ानून व न्यायिक संस्थाओं में फिर से भरोसा जगाने में अहम भूमिका निभाती है.