दूसरे विश्व युद्ध के अन्तिम दिनों में जब संयुक्त राष्ट्र की परिकल्पना को आकार दिया जा रहा था, तभी जापान के दो शहरों पर गिराए गए परमाणु बमों ने दुनिया को अपनी भयावहता व विध्वंस क्षमता के प्रति आगाह कर दिया था. इस बर्बादी के ठीक आठ दशक बाद, यूएन की 80वीं वर्षगाँठ के ऐतिहासिक अवसर पर एक उच्चस्तरीय बैठक में इन हथियारों में निहित ख़तरों और उनके उन्मूलन प्रयासों पर फिर चर्चा होगी. एक ऐसे क्षण में, जब विश्व में धधकते टकरावों व भूराजनैतिक तनावों के बीच, मानवता पर इन हथियारों का जोखिम मंडरा रहा है.