झड़पों के बाद गृहमंत्री रमेश लेखक ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया, जबकि संसद के आसपास की सड़कों की सुरक्षा के लिए सेना तैनात कर दी गई। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अशांति फैलाने के लिए ‘घुसपैठ’ को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन यह भी कहा कि सरकार का इरादा सेंसरशिप नहीं बल्कि सिर्फ रेगुलेशन का था