रेगुलेटर्स की जांच इन फर्मों के कुछ फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेड्स से जुड़ी थी। ये ट्रेड्स खासकर निफ्टी ऑप्शंस से जुड़े थे। कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी से ठीक पहले एफएंडओ मार्केट में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव देखा गया था। इस वजह से रेगुलेटर्स ने कुछ बड़े F&O ट्रेडर्स के ट्रेडिंग पैटर्न की जांच शुरू करने का फैसला किया