पिछले एक दशक में दर्ज की गई प्रगति के बावजूद, विश्व आबादी का एक बड़ा हिस्सा अब भी स्वच्छ जल, पर्याप्त साफ़-सफ़ाई और स्वच्छता, इन बुनियादी मानव आवश्यकताओं के अभाव में जीवन गुज़ारने के लिए मजबूर है. मौजूदा परिस्थितियों में दो अरब से अधिक लोगों पर बीमारी का शिकार होने और उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य व बेहतर भविष्य के अवसरों पर निरन्तर जोखिम बना हुआ है.