ग़ाज़ा में युद्धक गतिविधियों में घायल होने वाले ऐसे बच्चों की संख्या, हाल के दिनों में बहुत तेज़ी से बढ़ी है, जिन्हें अपने हाथ-पैरों से वंचित होना पड़ रहा है. अस्पतालों में संसाधन इतने कम हैं कि डॉक्टरों को जान बचाने के लिए कई बार मजबूरी में अंग काटने पड़ते हैं. जो बचे-खुचे अस्पताल अब भी काम कर रहे हैं, वो भी लगातार आ रहे गम्भीर और जटिल घावों वाले घायलों की बाढ़ से भारी दबाव में हैं. चिकित्सा सेवाओं और दवाइयों की भारी कमी है, और इलाज या पुनर्वास की सुविधा नहीं के बराबर है. एक वीडियो…