जतिन शर्मा
Lawrence gang plan on Baba Siddiqui murder: मुंबई के राजनीतिक और सामाजिक प्रभावशाली NCP के नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में अब तक कई बड़े सवाल सामने आ रहे हैं। लेकिन मुंबई क्राइम ब्रांच के पास अभी तक इनका जवाब नहीं हैं। हत्याकांड में 2 शूटरों की गिरफ्तारी के बावजूद, हत्या के पीछे के वास्तविक मकसद का खुलासा नहीं हो पाया है।
एक बड़ा सवाल यह है कि आखिर विजयदशमी का दिन ही क्यों चुना गया बाबा सिद्दीकी को मारने के लिए? क्या यह कोई धार्मिक या सांस्कृतिक संदेश देने की कोशिश थी या फिर पहले की रेकी असफल रही, जिसके कारण यह दिन चुना गया? पुलिस अभी तक इस प्रश्न का उत्तर नहीं खोज पाई है।
क्या सलमान खान से दोस्ती की सजा?
लॉरेंस बिश्नोई ने हत्याकांड की जिम्मेदारी लेते हुए एक पोस्ट डाली, लेकिन सवाल उठता है कि क्या बाबा सिद्दीकी को सलमान खान से गहरी दोस्ती की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी? या फिर यह लॉरेंस का मुंबई में अपना दबदबा स्थापित करने का प्रयास था?
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क्या लॉरेंस खुद को नया ‘सुल्तान’ समझ रहा है?
बाबा सिद्दीकी और लॉरेंस बिश्नोई के बीच कोई निजी दुश्मनी नहीं थी, न ही बाबा ने सलमान खान के घर के बाहर हुई गोलीबारी के मामले में कुछ बोला था। इसके बावजूद लॉरेंस ने बाबा को मारकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि मायानगरी में अब उसका सिक्का चलता है। क्या वह खुद को मुंबई का नया ‘दाऊद’ या ‘सुल्तान’ समझ रहा है?
कम उम्र के शूटर क्यों?
एक और बड़ा सवाल यह है कि शूटर दूसरे राज्यों से क्यों हायर किए गए? और क्यों कम उम्र के शूटरों को चुना गया? यह एक गहन योजना का हिस्सा लग रहा है, जिसका उद्देश्य कानून व्यवस्था को चकमा देना हो सकता है। पुलिस इस पर भी जांच कर रही है।
क्या इस हत्या के पीछे कोई रियल एस्टेट विवाद है? अगर ऐसा है, तो क्या दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी भी इसके पीछे हो सकती है? मुंबई पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है, क्योंकि 2013 में छोटा शकील ने बाबा सिद्दीकी को धमकी दी थी। D कंपनी के रियल एस्टेट से गहरे संबंध रहे हैं और यह कोई नई बात नहीं है।
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राजनीतिक एंगल?
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव आने वाले हैं और बाबा सिद्दीकी का राजनीतिक करियर बेहद मजबूत था। मुंबई में उनकी अच्छी पकड़ थी। ऐसे में चुनावों के ठीक पहले उनकी हत्या के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
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लॉरेंस की चुनौती और दाऊद का जिक्र
लॉरेंस विश्नोई ने इससे पहले भी जितने शूटआउट करवाए, उनमें वह खुलकर जिम्मेदारी लेता रहा है। बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में भी उसने पोस्ट डालकर जिम्मेदारी ली है। दिलचस्प बात यह है कि उसकी पोस्ट में दाऊद इब्राहिम का जिक्र भी था। क्या यह दाऊद को खुली चुनौती है? क्या लॉरेंस खुद को दाऊद का उत्तराधिकारी मान रहा है?
अख्तर और रणदीप को ही क्यों बुलाया?
इस हत्याकांड में चौथा आरोपी अख्तर है, जो पटियाला जेल में रहते हुए लॉरेंस विश्नोई गैंग से जुड़ा। वहीं, विदेश में बैठे रणदीप का नाम भी सामने आ रहा है, जो पानीपत का रहने वाला है और दिल्ली के नादिर हत्याकांड में भी शामिल था। इन दोनों की भूमिका भी पुलिस की जांच के केंद्र में है।
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मुंबई में लॉरेंस का मकसद क्या?
लॉरेंस बिश्नोई के बार-बार दाऊद को चुनौती देने और मायानगरी में डर का माहौल बनाने का मकसद क्या है? क्या यह उसकी कोशिश है कि मुंबई और बॉलीवुड में भय का साम्राज्य कायम कर करोड़ों रुपये की उगाही की जा सके? यह सारे सवाल अभी तक अनसुलझे हैं और मुंबई पुलिस इनकी तह तक जाने में जुटी हुई है।
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