दुनिया भर में करोड़ों लड़कियों और महिलाओं के लिए, मासिक धर्म जैसी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया, आज भी हर महीने एक चुनौती बन जाती है. कई महिलाएँ सैनिटरी पैड नहीं ख़रीद पातीं, उन्हें साफ़-सुथरे शौचालय नहीं मिलते, और वे इस विषय पर चुप्पी और शर्म के बीच जीवन जीती हैं. यह एक अनदेखा लेकिन बेहद गम्भीर वैश्विक संकट है, जो महिलाओं की सेहत, शिक्षा, गरिमा और लैंगिक समानता को गहराई से प्रभावित करता है.