संयुक्त राष्ट्र को सौंपे गए शासनादेशों या ज़िम्मेदारियों के ज़रिए, लाखों लोगों के जीवन में सुधार आया है. फिर भी, कार्यों में दोहराव, बिखराव और समय की नब्ज़ के साथ पटरी से उतर चुके कार्यों के कारण, इस विश्व संगठन के संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है. जिससे इस संगठन की, उन लोगों की सेवा करने की क्षमता कम हो रही है जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है.