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12वीं शताब्दी से चली आ रही यह चप्पल मुख्य रूप से महाराष्ट्र के कोल्हापुर, सांगली और सोलापुर जिलों में तैयार की जाती रही है। महाराष्ट्र और कर्नाटक सरकारों ने संयुक्त रूप से 2019 में कोल्हापुरी चप्पल के लिए जियोग्राफिकल इंडीकेशन टैग हासिल किया