(खबरें अब आसान भाषा में)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कदम को एक “नैतिक जिम्मेदारी” बताते हुए कहा, “यह उन हजारों परिवारों के वर्षों पुराने संघर्ष को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने भारत में शरण ली और अब तक उचित पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं