ग़ाज़ा में हिंसक टकराव, गहरे मानवीय संकट के बीच महिलाएँ और लड़कियाँ, सैनिटरी पैड, साफ़-सफ़ाई, और जल व निजता के बिना ही हर महीने माहवारी का सामना करने के लिए मजबूर हैं. यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य मामलों के लिए यूएन एजेंसी (UNFPA), इस ख़ामोश संकट से निपटने के लिए माहवारी स्वास्थ्य को मौजूदा राहत प्रयासों का हिस्सा बनाने, उसे प्राथमिकता देने में जुटा है.