नवाब वाजिद अली शाह की शाही ठाठ-बाट और वैभव हमेशा के लिए नहीं टिक पाए। धीरे-धीरे उनकी ज़्यादातर संपत्ति अंग्रेजों ने जब्त कर ली। इसके साथ ही ब्रिटिश सरकार ने उन पर करीब 20 करोड़ रुपये (आज के हिसाब से) का कर्ज भी डाल दिया। भले ही उन्हें पेंशन मिलती रही, लेकिन बढ़ते कर्ज और अवध से होने वाली आमदनी में भारी कमी के कारण उनकी आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे कमजोर होती गई