वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में जहाज़रानी उद्योग के योगदान को अक्सर नज़रअन्दाज़र कर दिया जाता है. मगर अब यह उत्सर्जन कटौती के लिए अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूती देने में जुटा है. यह बदलाव दर्शाता है कि विश्व के सबसे बड़े परिवहन सैक्टर में भी जलवायु मुद्दे पर जवाबदेही की दिशा में बढ़ा जा सकता है.