एक फ़लस्तीनी फ़ोटो पत्रकार समी शहादा ने, एक हमले में अपनी एक टांग खो दी, मगर कैमरा नहीं छोड़ा. समी शहादा ने युद्ध की तबाही के बीच भी अपने पेशेवर जज़्बे को जीवित रखा. विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर, मिलिए उन पत्रकारों से, जो मलबे के बीच खड़े होकर, दुनिया को सच दिखाने का हौसला बरक़रार रखे हुए हैं, भले ही इसकी क़ीमत उनकी अपनी जान ही क्यों न हो…(वीडियो)