Nithin Kamath: जीरोधा ने 2010 में अपनी सेवाएं शुरू की थी। उससे पहले सिक्योरिटीज में निवेश करने के लिए काफी ब्रोकरेज फीस चुकानी पड़ती थी। ज्यादा फीस का असर इनवेस्टर्स के रिटर्न पर पड़ता है। इस वजह से कई लोग चाहकर भी शेयरों में निवेश नहीं कर पाते थे। लेकिन, जीरोधा जैसे जीरो-कॉस्ट ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म की शुरुआत से पूरी तस्वीर बदल गई है