पिछले वर्ष, विश्व अर्थव्यवस्था के कुल विस्तार में एशिया-प्रशान्त क्षेत्र ने अपना 60 फ़ीसदी योगदान दिया, मगर इसके बावजूद यहाँ स्थित अनेक देश जलवायु झटकों का सामना करने और हरित व्यवस्थाओं को अपनाने से होने वाले नतीजों के लिए अब भी तैयार नहीं हैं. एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (UNESCAP) द्वारा प्रकाशित एक नई रिपोर्ट में यह निष्कर्ष साझा किया गया है.