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नई और पुरानी रीजीम के बीच सबसे बड़ा फर्क डिडक्शन के मामले मे है। इसके अलावा सेक्शन 87ए के तहत मिलने वाले रिबेट की लिमिट में भी फर्क है। नई रीजीम में ज्यादातर डिडक्शन नहीं मिलता है। सिर्फ सेक्शन 80CCD(2) के तहत एनपीएस में एंप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन पर डिडक्शन मिलता है