यूरोप की सबसे बड़ी इकोनॉमी जर्मनी अब अपने वित्तीय नियमों में ढील दे रही है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए बड़े अवसर खुल सकते हैं। जर्मनी की संसद ने 21 मार्च को आधिकारिक रूप से अपने “डेट ब्रेक” मैकेनिज्म में सुधार किया। यह नियम 2009 में तत्कालीन चांसलर एंजेला मर्केल के कार्यकाल में लागू किया गया था, जिसके तहत सरकार को ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) के केवल 0.35% तक का ही कर्ज लेने की अनुमति थी