(खबरें अब आसान भाषा में)
सूफ़ियान अल-मजदालवी, रात में अपने पारिवारिक घर के खंडहरों पर तिरपाल की चादर के नीचे सोते हैं. युद्ध के कारण महीनों तक विस्थापित रहने के बाद उत्तरी ग़ाज़ा में लौटने वाले अन्य लोगों की तरह, सूफ़ियान, बस इस तलाश में लगे रहते हैं कि जो कुछ भी मिल जाए, उसे सहेज कर रख लें.