(खबरें अब आसान भाषा में)
पिछले कुछ सालों में आर्थिक-सामाजिक स्थितियों में आए बदलाव के बाद सरकार यह समझ चुकी है कि पीएसयू बैंकों को प्राइवेट बैंकों से मुकाबला करना होगा। इसके लिए पीएसयू बैंकों का प्राइवेटाइजेशन जरूरी है। लेकिन, सरकारी बैंकों के प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया काफी सुस्त रही है