(खबरें अब आसान भाषा में)
युद्धग्रस्त ग़ाज़ा पट्टी के शरणार्थी शिविर में रह रहे एक फ़लस्तीनी व्यक्ति ने लड़ाई व तबाही के बीच, पिछले एक वर्ष के अपने अनुभव को साझा किया है. उनके शब्दों में यह एक ऐसी दर्दनाक व्यथा है, जिसे बयाँ नहीं किया जा सकता है.