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याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा था कि इसलिए बिना किसी भेदभाव के सभी महिलाओं के लिए करवा चौथ का पालन अनिवार्य करने के लिए कानून बनाया जाना चाहिए। उन्होंने करवा चौथ को ‘महिलाओं के लिए सौभाग्य का त्योहार’, ‘मां गौरा उत्सव’ या ‘मां पार्वती उत्सव’ घोषित करने की भी मांग की थी