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इस मसले पर सुनवाई करने वाली पीठ में खुद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शामिल डीवाई चंद्रचूड़ शामिल थे। उन्होंने और 7 अन्य जजों ने अपने फैसले में कहा कि शराब पर कानून बनाने के मामले में केंद्र के पास अधिकार की कमी है। सिर्फ जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस मामले में अलग फैसला दिया