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बैंक और एनबीएफसी अपने लोन की बंडलिंग करते हैं। फिर इसे सिक्योरिटी के रूप में बेचते हैं। इस प्रोसेस को सिक्योराइटाइजेशन कहा जाता है। विकसित देशों के फाइनेंशियल मार्केट्स में इसका काफी इस्तेमाल होता है। उसके मुकाबले भारत में सिक्योराइटाइजेशन का मार्केट छोटा है