मौजूदा दौर में, सशस्त्र संघर्ष के बाद युद्धविराम अक्सर नाज़ुक हालात में लागू किए जा रहे हैं और हिंसक टकरावों का पहले से अनुमान लगा पाना कठिन साबित हो रहा है. इस पृष्ठभूमि में, संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा को बढ़ते राजनैतिक तनावों, जानबूझकर फैलाई जाने वाली ग़लत सूचनाओं समेत अन्य चुनौतियों के बीच अपने तौर-तरीक़ों में आवश्यकता के अनुसार तेज़ी से बदलाव लाना पड़ रहा है.