अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर लिखे एक पोस्ट में बताया कि एक स्टार्टअप के शुरुआती साल ऐसे होते हैं जैसे कोई “प्रेशर कुकर” में जी रहा हो। उन्होंने कहा, “हर दिन आप ऐसे फैसले लेते हैं, जो या तो आपके सपने को आगे बढ़ाते हैं या उसे पीछे खींच देते हैं। यह ऐसा महसूस होता है जैसे आप अंधेरे में कुछ बना रहे हों, या शून्य में चिल्ला रहे हों।”