मंगलवार को पुष्टि हुई कि पिछले वर्ष अपना काम करते हुए रिकॉर्ड 383 मानवीय कार्यकर्ताओं को मौत के मुँह में धकेल दिया गया. इसके बावजूद ग़ाज़ा में तैनात एक वरिष्ठ संयुक्त राष्ट्र कार्यकर्ता ने मानवीय समुदाय की ओर से यह संकल्प दोहराया कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, वे हर जगह लोगों की जान बचाने व उनकी पीड़ा कम करने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे.