विश्व भर में जहाँ 2 अरब लोग, स्वच्छ व सुरक्षित जल के लिए संघर्ष कर रहे हैं और बढ़ती आबादी के साथ इस अहम संसाधन की मांग में वृद्धि हो रही है, वहीं, सिमटते भूजल स्रोतों, अत्यधिक दोहन, भूमि क्षरण, और जलवायु परिवर्तन से उपजी बाधाओं की वजह से, दुनिया अब ‘जल दिवालिएपन’ की स्थिति में क़दम रख चुकी है. 22 मार्च को ‘विश्व जल दिवस’ से पहले, यूएन न्यूज़ हिन्दी ने भारत में ऊर्जा, पर्यावरण और जल मामलों पर परिषद (CEEW) के संस्थापक और ‘विकास नीति पर यूएन समिति’ के सदस्य अरुणभा घोष से बात की, जिन्होंने बताया कि जल की बर्बादी में कमी, खेती के तौर-तरीक़ों में बदलाव और जलवायु सहनसक्षम फ़सलें, इस विकराल चुनौती से निपटने के लिए महत्वपूर्ण उपाय हैं…(वीडियो)