सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त मात्रा में और समय पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता बहुत आवश्यक है, लेकिन विकासशील देश इस दौड़ में पिछड़ रहे हैं और उन्हें ऊँची ब्याज़ दरों पर ही कर्ज़ मिल पाता है. संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया है कि ऋण लेने के लिए मौजूदा ‘रेटिंग’ व्यवस्था में अक्सर जोखिमों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है जबकि आर्थिक सम्भावनाओं की उपेक्षा कर दी जाती है. इस वजह से विकासशील देशों के पास धन की कमी है और विकास प्रयासों पर असर हो रहा है.