करिगौड़ा के खेत में लौकी की खेती का काम जून-जुलाई के आसपास शुरू हो जाता है। बीज बोने के करीब 70 दिन बाद पहली फसल तैयार हो जाती है और सितंबर के आसपास इसकी तुड़ाई शुरू होती है। इसके बाद सितंबर से दिसंबर तक लगातार लौकी की कटाई का काम चलता रहता है। छोटी लौकी की खेती से करिगौड़ा को अच्छी कमाई हो रही है, लेकिन वह सिर्फ इसी फसल पर निर्भर नहीं हैं। वह अपने खेत में बैंगन और टमाटर भी उगाते हैं। उनका बैंगन तमिलनाडु के होसुर बाजार में करीब 45 रुपये प्रति किलो बिकता है। अलग-अलग फसलें उगाने से उन्हें पूरे साल कमाई का जरिया मिलता रहता है और किसी एक फसल या बाजार पर निर्भरता भी कम होती है।