हाल की एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है कि दुनिया भर में, पुरुषों और महिलाओं के बीच असमानता को दूर करने का – टिकाऊ विकास लक्ष्य, 2030 तक हासिल किए जाने से काफ़ी दूर है! अब भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ महिलाओं को, पुरुषों के समान अधिकार या लाभ हासिल नहीं हैं. मसलन, एक जैसे कामकाज के लिए, महिलाओं को, पुरुषों की तुलना में, कम वेतन या लाभ मिलते हैं. निर्णय लेने के पदों या स्थानों पर भी महिलाओं की संख्या कम है. और यहाँ यूएन मुख्यालय में, यूएन महासभा के वार्षिक सत्र की उच्च स्तरीय जनरल डिबेट में भी, देशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए, बहुत कम संख्या में महिलाएँ आती हैं.
ऐसे में, लैंगिक समानता हासिल करने की दिशा में, हर देश की अपनी ज़िम्मेदारी है. जनसंख्या की नज़र से देखें तो, भारत की भी अहम भूमिका है.
भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय में सचिव अनिल मलिक के साथ, इन्हीं मुद्दों पर, यूएन न्यूज़ हिन्दी की बातचीत. (वीडियो)…