जले हुए घर. मारे जा चुके पड़ोसी. धूमिल होती आशाएँ. हिंसा के कारण विस्थापन. दैनिक गुज़र-बसर के लिए संघर्ष. 50 लाख से अधिक रोहिंग्या पुरुष, महिलाएँ व बच्चे इसी व्यथा को झेलते हुए शरणार्थी शिविरों या फिर घरेलू विस्थापितों के रूप में रहने के लिए मजबूर हैं. संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रमुख ऐनालेना बेयरबॉक ने मंगलवार को एक उच्चस्तरीय सम्मेलन में म्याँमार में रोहिंग्या मुसलमान व अन्य अल्पसंख्यकों की स्थिति पर गहरी चिन्ता जताते हुए कहा कि इस संकट के एक राजनैतिक समाधान की तलाश करना, मानवता की परीक्षा है.