(खबरें अब आसान भाषा में)
सेबी के होल-टाइम डायरेक्टर कमलेश वार्ष्णेय ने 2 जनवरी को इस घोटाले में अंतरिम ऑर्डर पारित किया। इस आदेश में शामिल बातें किसी जासूसी उपन्यास का अहसास कराती हैं। सेबी ने यह बताया है कि पारेख पर किस तरह शिंकजा कसा गया और उस तक पहुंचने के लिए मार्केट रेगुलेटर ने किस तरह प्लानिंग की