अखिलेश राय
Rajasthan: कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार के वक्त राज्य सरकार ने शांति धारीवाल के खिलाफ मुकदमे को वापस लेने का फैसला लिया था जिसपर हाईकोर्ट ने भी मुहर लगाई थी। जबकि निचली अदालत ने मामले को बंद करने की मांग खारिज कर दी थी। साल 2011 में जयपुर विकास प्राधिकरण ने दस बीघे का एकल पट्टा जारी किया था।
इस मामले की जांच ACB ने की थी और इस मामले में तत्कालीन ACS जी एस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर ,जोन आयुक्त ओंकार मल सैनी और कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक शैलेंद्र गर्ग को गिरफ्तार किया गया था। इसी मामले मे ACB ने कांग्रेस नेता शांति धारीवाल से भी पूछताछ की थी। हालांकि इस विवाद के बाद 2013 मे एकल पट्टा रद्द कर दिया गया था।
क्या है पूरा मामला?
साल 2012 में 29 जून को जयपुर विकास प्राधिकरण ( Jaipur Development Authority) ने गणपति कंस्ट्रक्शन के शैलेंद्र गर्ग के नाम एकल पट्टा जारी किया था। साल 2013 में इस मामले की शिकायत भ्रष्टाचार निरोध ब्यूरो (Anti Corruption Bureau) के पास रामशरण सिंह के ने दर्ज कराई। राज्य में सरकार बदलने के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और 3 दिसंबर 2014 को ACB ने पूर्व मंत्री शांति धारीवाल के खिलाफ केस दर्द किया। मामले में तत्कालीन ACS जी एस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर ,जोन आयुक्त ओंकार मल सैनी और कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक शैलेंद्र गर्ग को गिरफ्तार किया गया था। इसी मामले मे ACB ने कांग्रेस नेता शांति धारीवाल से भी पूछताछ की थी। इसके बाद राज्य में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन हुआ तो एसीबी ने शांतिधारीवाल सहित 3 अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी। हालांकि एसीबी कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। एसीबी कोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी आरोपी कोर्ट चले गए।
22 अप्रैल 2024 को कोर्ट में हलफनामा पेश करते हुए राज्य की भजनलाल सरकार ने शांति धारीवाल को क्लीनचिट दे दी, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया। मामले को लेकर जब हंगामा बढ़ा तो भजनलाल सरकार ने फैसला वापस लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में सभी शांति धारीवाल सहित सभी अधिकारियों पर मामला बनने की बात कही है।
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