जीवन्त या अमूर्त सांस्कृतिक विरासत हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच एक सेतु है. यह समुदायों की स्मृति को संजोए रखती है, पहचान को मज़बूत करती है और पीढ़ियों को जोड़ती है. इसी थीम को ध्यान में रखते हुए, यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (ICH) समिति का 20वाँ सत्र सोमवार को, नई दिल्ली में आरम्भ हुआ है, जिसमें दुनिया भर से आए प्रतिनिधि, 150 देशों की 788 सांस्कृतिक परम्पराओं की समृद्धि का जश्न मना रहे हैं और नए नामांकनों पर विचार कर रहे हैं.