संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, प्रभुत्वशाली देशों या साम्राज्यों के लिए नहीं है, बल्कि ये उन निष्ठावान, आशाओं से परिपूर्ण उन लोगों के लिए है, जिन्होंने युद्ध के अभिशाप से बचने के लिए इस संस्थान पर अपना भरोसा बनाए रखा है. बदलते समय के अनुरूप सुरक्षा परिषद में बदलाव किए जाने, इसकी सदस्यता बढ़ाने जाने की आवश्यकता है ताकि इसे अगले 80 वर्षों की चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाया जा सके.